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Shri Sanwaliya Sarkar

Shri Sanwaliya Sarkar
jai jai shree radhe

जब सबेरा होने लगता है

Author: Shree Sanwalia Mandir / Labels:

जब सबेरा होने लगता मुर्गे बोलने लगते तब श्रीकृष्ण की पत्नियों जिनके कंठो में श्रीकृष्ण ने अपनी भुजा डाल रखी है. उनके बिछोह की आशंका से व्याकुल हो जाती.
उस समय पारिजात की सुंगंध से सुवासित भीनी-भीनी वायु बहने लगती भौरे ताल स्वर से अपने संगीत छेड देते . भगवान प्रतिदिन ब्राह्म मुहूर्त में ही उठ जाते. और हाथ मुँह धोकर मायातीत आत्म स्वरुप का ध्यान करने लगते. इसके बाद वे विधिपूर्वक निर्मल और पवित्र जल से स्नान करते. फिर शुद्ध धोती पहनकर दुपट्टा ओढकर यथाविधि नित्यकर्म संध्या वंदन आदि करते. इसके बाद हवन करते. और मौन होकर गायत्री का जप करते. क्यों न हो, वे सत्पुरुषो के पात्र आदर्श जो है.
 इसके बाद सूर्योदय होने पर सूर्योपास्थान करते. और कालस्वरुप देवता, ऋषि और पितरो का तर्पण करते. फिर कुल के बड़े-बूढों और ब्राह्मणों की विधिपूर्वक पूजा करते. इसके बाद दुधारू पहलेपहल ब्यायी हुई बछडो वाली सीधी, शांत, गौओ का दान करते. उस समय उन्हें सुन्दर वस्त्र और मोतियों की माला पहना दी जाती. वे ब्राह्मणों को वस्त्राभूषणों से सुसज्जित करके तिल के साथ प्रतिदिन तेरह हजार चौरासी गौएँ इसी प्रकार दान करते. यधपि भगवान के शरीर का सहज सौंदर्य ही मनुष्य लोक का अलंकार है फिर भी वे अपने पीताम्बरादि दिव्य वस्त्र, कौस्तुभादी आभूषण, पुष्पों के हार और चन्दन, अंगराग से अपने को आभूषित करते. इसके बाद घी और दर्पण में अपना मुखारबिंद देखते. फिर चारो वर्णों के लोगो की अभिलाषाएँ पूर्ण करते और प्रजा की कामना पूर्ति करके उसे संतुष्ट करते. और सबको प्रसन्न देखकर स्वयं बहुत ही आनंदित होते.
भगवान ये सब करते तब तक दारुक नाम का सारथी सुग्रीव आदि घोडो से जुता हुआ अत्यन्तं अद्भुत रथ ले आता. और प्रणाम करके सामने खड़ा हो जाता. इसके बाद भगवान सात्यकि और उद्धव जी के साथ अपने सारथी का हाथ पकडकर रथ पर सवार होते. उस समय रनिवास की स्त्रियाँ लज्जा और प्रेम से भरी चितवन से उन्हें निहारने लगती भगवान मुस्कुराकर महल से निकलते. तदन्तर भगवान समस्त यदुवंशियो के साथ सुधर्मा नाम की सभा में प्रवेश करते.उस सभा की ऐसी महिमा है कि जो लोग उस सभा में जा बैठते है उन्हें भूख-प्यास, शोक-मोह, और जरा-मृत्यु, ये छै ऊर्मियाँ नहीं सताती. भगवान वहाँ जाकर श्रेष्ठ सिंहासन पर विराज जाते. उस समय यदुवंश वीरो के बीच में भगवान यदुवंशशिरोमणि भगवान श्रीकृष्ण की ऐसी शोभा होती जैसे आकाश में तारो से घिरे हुये चन्द्रदेव शोभायमान होते है.
सभा में विदूषक लोग विभन्न प्रकार के हास्य विनोद से नटाचार्ये अभिनय से और नर्तकियाँ नृत्यो से अलग-अलग अपनी टोलियो के साथ भगवान की सेवा करती. और वंदीजन उनकी लोक पावनी कीर्ति का गान और स्तुति करते.

“ जय जय श्री राधे ” .

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berasia, madhya pradesh, India
Shri Sanwaliya ji Mandir is one of the most beautful temples of shri Sanwaliya seth.There are many occasions celebrated in the temple by the devotees of lord Shri Krishna. Maha Janmashtami Parva is celebrated with great joys.As every temple has some historical aspects regarding its establishment in the same this temple is also having many facts which reflects the presence and mercy of god on every creaturebut because of the temple tradition these are not allowed to get revealed.This is not the message of temple community every fact as well as photo is uploaded by a devotee.